मुंबई -
सुबह जब दृष्टि की आंख खुली तो रिक्तम उसे गले लगाए सो रहा था , उसने धीरे से अपनी आंखें खोल कर रिक्तम को देखा फिर घड़ी की तरफ देखा , घड़ी में सुबह के 7:00 बज रहे थे । वो गहरी सांस लेकर बोली “ अब ये बंदा उठेगा कब और मुझे छोड़ेगा कब ? ” उसने ये कहा ही था कि उसके कानों में रिक्तम की एकदम अलसाई आवाज पड़ी “ तुमसे पहले उठता हूं मैं !! अभी-अभी जिम जाकर आया हूं , पसीने की बदबू भी नहीं आ रही ? ”







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