मुंबई -
आज संडे था। दृष्टि और रिक्तम दोनों कार में थे और आज रिक्तम खुद गाड़ी चला रहा था। दृष्टि उसके पास वाली चेयर पर मुंह फुलाकर बैठी थी, अपने दोनों हाथ सीने के आगे बांधे, खिड़की से बाहर देख रही थी। और रिक्तम को सच में वो बहुत क्यूट लग रही थी। उसे बड़ा मज़ा आ रहा था दृष्टि को ऐसे देखकर।







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