मुंबई -
रिक्तम समझ गया, उसकी मां क्या चाहती है। वो चुपचाप जाकर दरवाजे पर खड़ा हो। रुशाली ने लाकर दृष्टि को भी दरवाजे पर खड़ा किया और प्यार से उसके चेहरे को छूते हुए बोली, "तुम यहीं पर रुको, मैं अभी तुम्हारे गृह प्रवेश की तैयारी करके आती हूं। तुम बहू हो इस घर की और तुम्हें वो सारे हक मिलेंगे, जो तुम्हें मिलना चाहिए।"







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