मुंबई -
दक्ष चुपचाप उस लड़की को देखता रहा। उसने दरवाजा खोला तो वो चुपचाप रिहर्सल रूम में आ गया। यहां पर काफी सारी चीज़ें , कपड़े, चेयर्स वगैरा ऐसे ही इधर-उधर पड़े थे। शायद किसी चीज़ की रिहर्सल करते-करते यहां से सब उठकर गए थे। उसने उन सारी चीज़ों को ऐसे ही पड़े रहने दिया। आकर एक चेयर पर बैठा और अपनी पीठ पर टंगे उस बैग को निकाल कर उसमें से कुछ पेपर्स निकाल कर पढ़ने लगा।







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