मुंबई -
सक्सेना साहब शानी को समझाने के लिए बोले, “शानी, तुम मेरी दुश्मन नहीं हो। मेरी औलाद ही हो। जैसे मेरे दूसरे बच्चे अपने-अपने फील्ड में आगे बढ़ गएं, मैं तुम्हें भी कुछ करते हुए देखना चाहता हूं। वरना क्या पड़ी है मुझे कि मैं हर रोज तुम्हें कहूं कि कुछ करो, जिंदगी में आगे बढ़ो?







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