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Blessings as a gift

हैदराबाद , त्रिहाल मेंशन -

मानी इस वक्त बेड पर लेटी हुई थी , उसकी आंख अभी नहीं खुली थी , उसे उस रेशमी चादर ने ढक रखा था , शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था और अचानक उसके चेहरे पर धूप गिरी , ऐसे अचानक चेहरे पर धूप आते ही गर्मी का एहसास हुआ , उसने अपनी आंखें खोलने की कोशिश की तो उसके सामने एक परछाई आ गई । मानी ने मुश्किल से अपनी आंखें खोल कर देखा ।

सामने अभंग खड़ा था , वो चुप बिल्कुल रेडी था , वो धीरे-धीरे बार-बार अपनी पलके झपकाते हुए बोली “ क्या कर रहे हैं आप ? ” वो उसके पास आया और धीरे से उसके हाथों को पड़कर उसे उठाकर बैठाते हुए बोला “ तुम्हें उठाने की कोशिश कर रहा हूं मैडम ! मुझे पता है तुम्हारा कोई रूटिंग नहीं है, कोई शेड्यूल नहीं है ! हमेशा लेट उठती हो , तो कभी जल्दी भी उठ जाती हो पर तुम्हें शेड्यूल बनाना पड़ेगा क्योंकि तुम्हारे पति को 5:00 उठने की आदत है !!!!

और जो मैं उठ जाता हूं ना तो तुम्हें सोते देखना मुझसे बर्दाश्त नहीं होता ! मन करता है तुम उठ जाओ और बस तुमसे बातें करता रहूं , तो बस उठ जाओ ! ” मानी ने उबते हुए उसे देखा , धूप आ रही थी मतलब पांच नहीं काफी ज्यादा बज चुके थे ! उसने धीरे से गर्दन मोड कर टाइम देखा ,

सुबह के 9:00 बज रहे थे ! वो अपनी आंखें बार-बार भींचते हुए बोली “ 9:00 बज गए ! अभंग इंसान को तब उठाया जाता है जब वो सोया हो , और आपने मुझे पूरी रात नहीं सोने दिया ! तो आप ऐसे मुझे 5:00 बजे नहीं उठा सकते ” वो वापस लेटने को हुई कि अभंग ने उसे गोद में उठा लिया ।

मानी ने हैरानी से उसे देखा , वो हल्के गुलाबी रंग की सिल्की चादर अब भी उसके बदन पर लिपटी हुई थी , कंधों तक वो पूरी खुली थी । उसने अभंग को गले से पकड़ रखा था ताकि गिर ना जाए और वो वैसे ही बोली “ अभंग क्या कर रहे हैं आप ? सोने दीजिए ना ”

अभंग ने ना में सिर हिलाकर कहा “ बिल्कुल नहीं !! आज हम दोनों को कहीं जाना है , काम इंपॉर्टेंट है तो तुम्हें मेरे साथ चलना पड़ेगा ! फटाफट तैयार हो जाओ ” मानी हैरानी से उसे देखते रह गई और अभंग ने लाकर सीधा उसे उस गर्म पानी से भरे बाथ-टब में लेटाया था ‌

वो हैरानी से उस बाथ-टब को देखने लगी , शायद अभंग ने उसी के लिए रेडी किया था । वो अभंग को बार-बार पलके झपकाते हुए देखने लगी तो वो बोला “ नहा लो मैं तुम्हारे लिए कपड़े निकाल रहा हूं , और फटाफट तुम बहार आओगी क्योंकि वैसे ही हमें बहुत ज्यादा लेट हो चुका है तुम्हारी नींद के चक्कर में ”

वो वहां से चला गया , मानी को समझ में नहीं आया वो क्या बोले ? उसका पति पागल था और किस तरह का पागल था ये मानी के दिमाग में बैठ नहीं रहा था ! वो चुपचाप नहाने लगी , क्योंकि पानी के अंदर उसे नींद नहीं आने वाली थी ।

कुछ देर बाथटब में बैठे रहने के बाद नहा कर बाथरोब पहन कर बाहर आई थी । बाहर आई तो देखा उसके रेडी होने की सारी चीज निकल कर रखी थी , उसके लिए सैंडल , उसके कपड़े , ज्वेलरी जो उसे उन कपड़ों के साथ पहननी थी, सब कुछ !!!! मानी ने इधर-उधर देखा तो अभंग कहीं पर भी नहीं था। ! वो चुपचाप उन कपड़ों के पास चली आई ,

उसने देखा ये एक साड़ी थी मैरून रंग की साड़ी ! जिसका बॉर्डर गोल्डन कलर का था , काफी सिंपल पर काफी खूबसूरत साड़ी थी ! इसका फैब्रिक और शाइन देखकर ही पता चला था कि ये काफी महंगी होगी ,मानी ने चुपचाप साड़ी को पहना , उसे वैसे भी साड़ी बहुत पसंद थी और अब तो उसके पास ऑफीशियली वजह थी साड़ियां पहनने की !

डर उसे आज भी था कि कहीं उसके निशान दिख ना जाए पर फिर भी उसने इस साड़ी को रखना ना सोचा ! ये बहुत खूबसूरत थी , उसने साड़ी को पहना , बालों को कोम्ब करके ऐसे ही खुला छोड़ दिया , मांग में सिंदूर को लगाया और वो गोल्डन सेट जो अभंग उसके लिए रख कर गया था वो पहना , वो ब्लैक कलर की हिल्स , वो मुस्कुराई ।

हिल्स ना होती तो वो अभंग के कंधे तक भी नहीं आने वाली थी , उसने उन हिल्स को भी पहना , हाथों में शादी वाला चूड़ा अब भी पहना हुआ था , वो दिल्ली से थी फिर जैन भी थी ! उनमें चूड़ों की मान्यता बहुत ज्यादा थी , वो इन चूड़ों को नहीं निकलने वाली थी और ये चूड़े उसके मेहंदी वाले हाथों में बहुत प्यारे भी लग रहे थे ।

वो रेडी होकर खुद को आईने में देखने लगी , आज भी आंखों पर वैसे ही सुरमा-काजल और आईलाइनर लगाया हुआ था, जिससे उसकी वो ग्रे आंखें और ज्यादा खूबसूरत लग रही थी , साड़ी से मैचिंग होठों पर लिपस्टिक लगा रखी थी ,

न जाने उसके चेहरे पर कौन सा ग्लो आया था शादी का , जो उसकी खूबसूरती को इस कदर निखारे हुए था , वो अभी अपने आप को आईने में देख रही थी और दरवाजा खुला । मानी ने आईने में ही पीछे देखा पीछे से अभंग आ रहा था , आ क्या रहा था ? वो दरवाजा पर बस रुक चुका था , ना कदम हिले थे ना नजरे हटी थी ।

उसने गहरी सांस लेकर अपने सीने पर हाथ रखते हुए बड़े आशिकाना अंदाज में कहा “ हाए….. अब तो आप जान लेने पर उतारूं हो गई है मिसेज अभंग !!! ” उसने अपना सिर एक तरफ झुकाया था जैसे सच में वो फिदा हो गया ।

मानी अपना चेहरा नीचे झुका लिया और बालों को कान के पीछे करते हुए बोली “ बस … हो गई तारीफ अब मुझे बताइए आपको कहां लेकर जाना था मुझे ? जो आपने मुझे इतनी जल्दी उठा कर तैयार किया !!!! ” अभंग उसके पास आया और उठाते हुए बोला “ मिसेज अभंग माना आपका पति बड़ा काम आता है फिर इसका मतलब ये नहीं है कि आप सुबह के 9:00 को जल्दी कहे !!! लोगों के लिए आधी दोपहर हो जाती और अब तो वैसे भी 10:30 बज चुके हैं !!!! ”

उस उबकर उसे देखने लगी ,और अभंग उसके हाथ को अपने हाथों में लेकर उसे बाहर की तरफ ले जाते हुए बोला “ चलो भी ” मानी उससे पूछती रह गई पर उसने नहीं बता कि वो कहां जा रहे हैं , इन फैक्ट जब वो नीचे आए तो नीचे भी कोई नहीं था , उसने ये भी पूछा कि घर के सारे लोग कहां गए हैं पर अभंग ने फिर भी कोई जवाब नहीं दिया ।

उसने लाकर मानी को सीधा गाड़ी में बिठाया और कार खुद ड्राइव करने लगा , मानी को समझ नहीं आ रहा था वो कहां लेकर जाना चाहता है उसे ? पर अभंग ने उसे कोई जवाब नहीं दिया और कुछ ही देर में उसे समझ आ गया था कि अभंग कहां ले जा रहा है ? वो उसे लेकर आश्रम आया था !

पर मानी ने देखा आश्रम में भी कोई नहीं था , कोई दिख ही नहीं रहा था आश्रम के बाहर । अभंग ने सीट बेल्ट निकाला और अपनी तरफ से दरवाजा खोल कर बाहर आया , वो मानी की तरफ आकर दरवाजा खोलते हुए बोला “ पार्टी गाड़ी में नहीं है , बाहर आओ ”

मानी हैरानी से गाड़ी से बाहर निकलते हुए बोली “ पार्टी है ? ” अभंग ने एक बार फिर से उसका हाथ पकड़ लिया और आगे बढ़ते हुए बोला “ पार्टी नहीं है मेरी मां , चलो तो सही ! ” और वो उसके पीछे चलने लगी , वो थोड़ा आगे चले आए ।

मानी अब भी कंफ्यूजन में थी, अगर उन्हें आश्रम नहीं आना था तो अभंग ने आश्रम के बाहर गाड़ी रुकी ही क्यों ? और चलते-चलते अभंग रुक गया , मानी अभी भी अपनी सोच में थी और चले जा रही थी , बिना ध्यान दिए चलने की वजह से वो अभंग से ही टकरा गई ।

उसने सिर उठाकर अभंग की तरफ देखते हुए कहा “ रुके क्यूं ? ” पर वो उसे नहीं देख रहा था , वो तो अपने राइट साइड में देखते हुए उस तरफ मुंह करके खड़ा होता गया था । मानी ने भी उस तरफ देखा तो आंखें हैरानी से बड़ी हो गई , वहां पर एक फोर्थ फ्लोर वाली बिल्डिंग थी , काफी अच्छी , काफी खूबसूरत और काफी बड़ी ! जिसके ऊपर बिचो बीच में वो बड़ा सा बोर्ड लगा हुआ था “ मान्यता पब्लिक स्कूल ” का ।

मानी हैरान थी , उस बिल्डिंग के सामने ही घर के सारे लोग खड़े थे , आश्रम के सारे बच्चे खड़े थे और आश्रम की पूरी टीम वहीं पर थी ! मानी को समझ में नहीं आया ये सब क्या था ? और अभंग ने प्यार से उसकी तरफ देखते हुए कहा “ लोग शादी के गिफ्ट में डायमंड्स देते हैं , कपड़े देते हैं , खाने देते हैं , ऐसी चीज देते हैं जो सालों तक संभाली जा सके !!!! तो मैं तुम्हें अपनी शादी के तोहफे में दुआएं दे रहा हूं !!! जो हमेशा बढ़ती रहेगी पर कभी खत्म नहीं होगी ”

मानी हैरानी से बिना कुछ बोले बस अपनी आंखें फाड़े उसे देखने लगी और वो वैसे ही बोला “ तुम्हारे नाम से ये स्कूल बना है ! जहां अनाथ आश्रम के सारे बच्चे फ्री में पढ़ेंगे , और सिर्फ अनाथ आश्रम के बच्चे नहीं ! वो हर बच्चा जो फीस अफोर्ड नहीं कर सकता उन सब को पढ़ाई मिलेगी ! उन सबको एजुकेशन मिलेगी , सिर्फ तुम्हारे नाम पर !!!!! और जो इन सब की दुआएं होगी वो तुम्हें मिलेगी जिंदगी भर !!!! ”

मानी को समझ में नहीं आया वो क्या बोले ? आंख से एक कतरा आंसू बहा , बोलना तो बहुत कुछ था पर मुंह से कुछ निकल नहीं रहा था और सामने खड़े विश्वास जी जरा जोर से बोले “ अरे मुहूर्त निकाला जा रहा है भई…. आ जाओ ” अभंग ने हां में सिर हिलाया और मानी को साइड हग करते हुए उसे उन सबके पास ले आया ।

वहां पर इनॉग्रेशन के लिए वो रेड रिबन बंधा हुआ था , एक तरफ आश्रम के ही एक स्टाफ मेंबर अपनी थाली में कैंची लिए खड़ी थी , अभंग ने मानी को लाकर वहां खड़ी करते हुए उस थाली में से कैंची उठाकर उसके हाथ में थमते हुए कहा “ शुरू करो , इसे किसी ने भी नहीं देखा ! पहले तुम अंदर कदम रखो उसके बाद सब अंदर जाएंगे ”

अभंग ने उसका एक हाथ पकड़ रखा था और मानी ने उस रेड रिबन को काटा , उसके रिबिन काटते ही वहां खड़े चार-पांच लोगों ने वो फायरक्रैकर्स जलाईं , जिसके अंदर से वो रंग-बिरंगे कागज उड़कर उन लोगों के ऊपर गिरे ।

मानी ने आसमान की तरफ देखा और अभंग ने सब की तरफ इशारा किया , उसने खुद अलता से भारी थल को गेट के अंदर की साइड रखा और वहां पर एक कपड़ा लगाया और फिर मानी को अंदर आने का इशारा किया , मानी आलता की थाल में पैर रखकर अंदर आई और उस कपड़े पर अपने दोनों पैर टिका दिए ।

वो थोड़ी सी आगे आई और स्कूल के अंदर गई और अभंग ने वो कपड़ा उठाकर विराज को देते हुए कहा “ इसे फ्रेम करवा दो और स्कूल के गेट पर ही इसे लगाना !!! कहते हैं औरत घर लक्ष्मी होती है !! तो मैं चाहता हूं इस स्कूल में हमेशा ऐसे ही खुशहाली रहे ”

विराज ने हां में सिर हिलाया और उस कपड़े को ले लिया ! मानी ने ये सब सुना था पर कुछ कहा नहीं , वो स्कूल के अंदर थी , अभंग ने सारे बच्चों लोगों की तरफ इशारा किया तो वो सभी स्कूल के अंदर चले गए । वो सब लोग स्कूल को देखने लगे थे , 4th फ्लोर वाला ये स्कूल जहां एक से 12 तक पढ़ाई का इंतजाम किया हुआ था ! सेक्शंस बांटे हुए थे ।

और हर गरीब बच्चा जो फिस अफोर्ड करके नहीं पढ़ सकता था उनके लिए स्कूल बनाया गया था ! कंप्यूटर्स , लाइब्रेरी , लैब हर चीज का इंतजाम करवा दिया था !!

लगभग आधे घंटे तक तो सब लोग इधर-उधर होकर स्कूल को ही देखते रहे और घूमते रहे और फिर सबको ऑडिटोरियम में बुलाया गया जो आश्रम और स्कूल की बिल्डिंग के बीच में बना हुआ था , वहीं पर क्लब हाउस भी बनाया हुआ था । अभंग इस वक्त स्टेज पर खड़ा था , और माइक उसके सामने था ।

वो सबको देखते हुए बोला “ इनॉग्रेशन आज हो चुका है , यहां पर टीचर्स का इंतजाम कर दिया था और वो चीज जिनकी बच्चों को जरूरत होती है उस हर चीज का इंतजाम किया गया है ! बच्चों को एक भी पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है क्योंकि विद्या फ्री में ही मिलनी चाहिए क्योंकि ये अनमोल होती है !!! और आज से ये स्कूल आप सबका हुआ , हां इसे हैंडल हमारी मिसेज अभंग करेंगी क्योंकि ये सोशल वर्कर है , ये स्कूल इन्हीं के नाम पर बना है , ये स्कूल इन्हीं की वजह से बना है !!! सो थैंक्स टू हर !!! अगर वो नहीं होती तो शायद मैं इस स्कूल के बारे में सोचता भी नहीं !!! ”

सब लोगों ने तालियां बजाई और एक साथ थैंक्यू कहा , मानी अभंग के साथ ही स्टेज पर खड़ी थी , ये सब खत्म करने में कहीं ना कहीं एक डेढ़ घंटा बीत चुका था क्योंकि बच्चों के लिए आज स्कूल में ही खाने का इंतजाम भी किया गया था ! इन सब को खत्म करने के बाद ऐसे ही बच्चों से बातचीत कर रहे थे और अभंग का फोन बजा ।

वो वहां से निकाल कर कॉल उठाकर वहां से थोड़ा सा साइड में आ गया , इस पूरे वक्त में मानी का पूरा ध्यान सिर्फ अभंग पर था , लगभग 10 मिनट तक अभंग फोन पर ही बात करता रहा और उसके बाद उसने पलट कर देखा तो पीछे ही मानी खड़ी थी । वो उसे देखते हुए थोड़ा सा खुश होकर तो हैरानी के साथ बोला “ कमल है , तुम मेरे पीछे खड़ी हो और मुझे पता भी नहीं चला , ”

मानी कुछ भी नहीं बोली, उसे इतना खामोश देखकर वो उसे अपने करीब करते हुए बोला “ मानी… कुछ हुआ है क्या ? ” मानी ने ना में सिर हिलाया और अपने हाथ उसकी कमर पर लपेटकर उसे गले लगा लिया ।

अभंग टो कुछ समझ में नहीं आया , उसने मानी के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा “ मानी क्या हुआ ? किसी ने कुछ कहा क्या ? ” मानी ने गले लगे हुए ना में सिर हिलाकर कहा “ बाबा हमेशा कहते थे कि जितना प्यार एक लड़की को उसका बाप देता है उससे ज्यादा उसे कोई प्यार नहीं दे सकता !!! हां उसकी बराबरी पर उसका पति जरूर दे सकता है पर ये भी तब जब जिससे वो शादी करें वो इंसान सही हो !!!!

मुझे नहीं समझ आ हा था की बाबा शादी के लिए कैसे माने ? आपने क्या कहा उनसे ? पर आज लग रहा है कि बाबा का फैसला बिल्कुल सही था जो उन्होंने मेरी शादी आपसे करवाई ! वो जानते थे कि उनके बाद आप मुझे उनके जितना ही प्यार दोगे … इसीलिए उन्होंने बिना कुछ सोचे समझे आपसे मेरी शादी करवा दी ”

उसकी बात सुन अभंग हल्का सा हंसा और उसके चेहरे को अपने हाथों में भरकर कहा “ बिल्कुल नहीं !!! मैं तुमसे तुम्हारे पापा के जितना प्यार नहीं करता !!! मैं उससे कई ज्यादा प्यार करता हूं तुमसे मानी !!! और हमेशा चाहता हूं कि तुम सिर्फ रहो खुश रहो , रोते नहीं देख सकता में तुम्हे प्लीज चुप हो जाओ ” मानी ने सिर उठाकर उसे देखा और बस देखती रही !!!

मुंबई में -

यामी सुबह के 11:30 बजे उठी थी , तब अलक सो रहा था इसलिए वो उठकर रेडी होकर बाहर चली आई थी , पर अब उसे फिक्र हो रही थी , देखना था कि अलक ठीक है की नहीं? और वो उसके लिए काफी और ब्रेकफास्ट लेकर कमरे में आई थी , कमरे में आई तो देखा अलक बालकनी में खड़ा किसी से फोन पर बात कर रहा था ।

वो रेडी था , शायद बाहर आया नहीं था ! वो वहीं बैठ गई और उसका इंतजार करने लगी , करीब 10 मिनट बाद अलक वापस आया , उसने यामी को वहां देखा तो वो खड़े होते हुए बोली “ 11:00 बज गए , आप बाहर नहीं आए थे तो सोचा आपका ब्रेकफास्ट रेडी कर दूं ! आप कर लीजिए और फिर बाहर आ जाइए ”

वो इतना बोल वहां से जाने को हुई थी अलक ने तेज रफ्तारी से उसकी तरफ बढ़ते हुए उसकी कलाई पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचा , यामी ने हैरानी से सिर उठाकर उसे देखा , उसे समझ नहीं आया अलक ने ये क्यों किया ? वो बार-बार अपनी पलके झपकाते हुए अलक को देखने लगी और वो उसे छोड़कर उससे एक कदम की दूरी पर हटते हुए बोला “ मुझे कुछ पूछना था तुमसे ”

यामी ने हा में सिर मिलाया तो वो बोला “ कल रात की बातें मुझे ठीक से याद नहीं … तुमने कुछ कहा था क्या ? ” यामी को समझ नहीं आया वो किन बात की बात कर रहा है ? उसने कंफ्यूज होकर कहा “ कौन सी बात ? ” अलक उसके एक कदम फिर से करीब आते हुए बोला “ प्यार करती हो… कुछ ऐसा कहा था ? मुझे पूरा याद नहीं आ रहा ! फिर से कहोगी प्लीज ”

यामी समझ गई अलक क्या चाहता है ? उसने तुरंत चेहरा झुका लिया , क्योंकि चेहरा शर्म से लाल हो चुका था ! वो एकदम से अपने कदम पीछे लेते हुए बोली “ नई तो …. मैंने…मैंने तो कुछ नहीं बोला ” वो वहां से भाग गई ।

अलक मुस्कुराया , वो जानता था वो डरपोक थी ! वो बेहद डरपोक थी और अगर उसने कुछ कहा था तो वो ऐसे ही तो नहीं कहा था ! बड़ी हिम्मत करके उसने अपनी सच्चाई खोल कर रखी थी अलक के सामने और अलक इन चीजों को सिर्फ एक डर का नाम देकर झुठला नहीं सकता था ।

उसने कॉफी टेबल पर पड़े ब्रेकफास्ट को देखा और कॉफी का मग उठा कर कुछ सोचते हुए बोला “ बस आज का दिन और मैं सब कुछ जान कर रहूंगा !!!! मेरा वजूद ! तुम्हारा वजूद और हमारे बाप का वजूद !!! सब कुछ , अगर मेरा पिता अभय त्रिहाल है तो मैं छोड़ूंगा नहीं उस इंसान को जिसने मुझे आज तक अंधेरे में रखा !!! बस आज का दिन !! ये 24 घंटे और मुझे मेरी पहचान पता होगी !!!! ”

न जाने अलक ने क्या सोचा था पर उसके दिमाग में कुछ तो चल रहा था ! यहां यामी अलक के कमरे से निकलकर सीधा महेश जी के पास आई थी , उसने सोचा था कि महेश जी जब खुद से बताएंगे तो वो जान लेगी पर अलक से बात करके उसे लग रहा था कि उसे खुद ही महेश जी से सब कुछ पूछ लेना चाहिए ।

वो जब महेश जी के पास आई तो वो किसी से बात कर रहे थे, होटल मेहमानों से भर चुका था क्योंकि शाम को संगीत की रस्म थी और कल सब लोगों को रिसेप्शन के लिए हैदराबाद जाना था ! आशी और अक्षर की शादी एक दिन की डीले पर थी ! हैदराबाद से लौटकर उनकी शादी थी इसलिए मेहमानों की हलचल कुछ ज्यादा ही थी ।

वो महेश जी के पास आई तो महेश जी ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फिरते हुए कहा “ तुम्हारे पास ही आ रहा था ” उसने अपने सामने खड़े आदमी की तरफ देखा तो उसने हां में सिर हिला कर बस ओके कहा और वहां से चला गया और अब यामी ने अपने बाप की तरफ देखकर मासूमियत से पूछा

“ क्या अब मैं जान सकती हूं कि कल मेरे पति उस हाल में क्यों थे ? आपने उनसे ऐसा क्या कहा जो वो इतना टूट गए थे ? बाबा मैंने उन्हें कभी ऐसे नहीं देखा ! रोना छोड़ो उदास तक नहीं होते वो और कल मैंने… कल मैंने महसूस किया कि वो रो रहे थे , क्या हुआ था कल ? आप दोनों के बीच ऐसी कौन सी बात हुई जो उन्हें इतना हर्ट कर गई ? ”

महेश जी ने गहरी सांस ली और यामी का हाथ पकड़ कर उसे सोफा पर बैठाया और उसके पास बैठकर उसके दोनों हाथों को अपने हाथों में लेकर कहा “ अब जो मैं तुम्हें बताने जा रहा हूं उसे ध्यान से सुनना ! समझना ! क्योंकि इसमें कोई भी गलत नहीं है , ना अलक , ना अभंग !! ”

यामी ये बहुत ही समझ गई की बात अभंग से जुड़ी हुई है और कहीं ना कहीं उसे जो खटक रहा था वही हुआ , महेश जी ने यामी को बता दिया “ अभंग , अक्षर और अलक तीनों भाई है !! अलक और अभंग दोनों ही हवाला का धंधा करते हैं , एक दूसरे के राइवल्स है और एक दूसरे को पसंद नहीं करते ! क्योंकि कुछ तो ऐसा हुआ है जिसकी वजह से वो एक दूसरे से अलग हो चुके हैं ।

कुछ ऐसा है कि उन दोनों को ही कुछ ना कुछ गलत बताया गया ! जिससे वो दोनों एक दूसरे को भाई नहीं मानते , पर अब जब मैंने कल अलक की पहचान पर सवाल खड़े किए हैं तो अलक खुद ये सब पता लगाएगा और उसे पता लगाना भी चाहिए क्योंकि वो उन दोनों का बड़ा भाई है ! और बड़ा भाई बाप के समान होता है ! जब वो खुद ही सारी सच्चाई पता लगाएगा , तो सब कुछ ठीक हो जाएगा !!!!! किसने क्या किया है? और वो लोग कैसे अलग हुए ? क्या हुआ था अक्षर की पैदाइश के वक्त ? सब कुछ क्लियर हो जाएगा !!! और ये काम सिर्फ अलक ही कर सकता है !!!! ”

महेश जी ने सब तो नहीं पर कुछ कुछ बातें बोल कर काफी कुछ बता दिया था , उनकी सारी बातें सुनने के बाद यामी को समझ में नहीं आया वो क्या बोले ? वो खामोशी और थोड़ी हैरानी के साथ उन्हें देख रही थी और महेश जी ने प्यार से कहा “ तुम फ़िक्र मत करो , गलत कुछ भी नहीं हो रहा है ! जो गलत हो रहा था वो सही हो रहा है , ठीक है ? ”

वो थोड़ी सी परेशान तो हो गई थी पर जैसा कि महेश जी ने कहा था गलत कुछ भी नहीं हो रहा था ! इन फैक्ट जो गलत हुआ था अब वो सही होने जा रहा था जिसकी अलक और महेश जी के सिवाय किसी को भनक तक नहीं थी ।

दिन ऐसे ही बीत चुका था , ये सब कुछ होने के बाद महेश जी , यामी और अलक तीनों ने ही इस चीज का फिर से जिक्र नहीं किया था ! सब संगीत की तैयारी में लगे हुए थे क्योंकि अक्षर और आशी का संगीत था ,

शाम को होटल के होल में संगीत का प्रोग्राम रखा गया था , बीच में स्टेज लगाया गया था और आसपास सारे मेहमानों की चहल पहल थी ! धीरे-धीरे करके परफॉर्मेंस शुरू हो चुके थे , सब लोग यहां मौजूद थे , संगीत को एंजॉय कर रहे थे पर अलक रहा मौजूद नहीं था ।

क्योंकि वो इन सबसे अलग टेस्ट पर खड़ा था , उसके सामने अर्जुन और तुषार दोनों अपने हाथ पीछे की तरफ बांधे खड़े थे , पर उन दोनों की ही नजरे अलक की नजरों से मिली हुई थी ।

अलक के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे , उसने गहरी सांस ली और आसमान की तरफ देखा और अर्जुन ने बड़े शांत लहजे में कहा “ आई नो सर आपको ये सब जानकर बहुत तकलीफ हो रही होगी ! बट ये सब कुछ सच है !!! हमें नहीं पता आपकी दादी ने ये सब क्यों किया ? पर ये सब उनकी वजह से हुआ ! अगर वो आपको सब पहले ही सच बता देती और वो सारे सबूत ना मिटाती तो ऐसा कुछ भी नहीं होता ! आपकी कोई गलती नहीं है सर , आपने कुछ भी नहीं किया ”

अलक ने गहरी सांस फिर से छोड़ी और वही रखी चेयर पर बैठ गया , ऐसा लग रहा था किसी गहरी सोच में हो । अर्जुन और तुषार दोनों को उसकी फिक्र हो रही थी , उन दोनों ने एक बार एक दूसरे की तरफ देखा और वापस अलक की तरफ देखने लगे ।

तुषार ने वैसे ही कुछ सोचकर कहा “ अब क्या करना है सर ? ” अलक ने जमीन को घूरते हुए वैसे ही कहा “ वो… जो बहुत पहले कर देना चाहिए था !!! ” तुषार ने एक बार अर्जुन की तरफ देखा और फिर बोला “ क्या करना है सर ? ” अलक ने उन दोनों की तरफ देखा और वापस खड़े होते हुए बोला “ सारे सबूत फिर से कलेक्ट करो !!! और कल से पहले मुझे वो चाहिए , अब मुझे वो करना है जो मुझे बहुत पहले कर देना चाहिए था !!! ”

और वो बोलते बोलते वहां से चला गया । तुषार और अर्जुन अब भी वही खड़े थे , तुषार ने अर्जुन की तरफ देखकर कुछ सोचते हुए कहा “ सर क्या करने की कोशिश कर रहा है ? सब कुछ तो बर्बाद हो चुका है ! आधी उम्र गुजर चुकी है , अब वो क्या करना चाहते हैं ? बातें इतनी बिगड़ चुकी है और वक्त इतना आगे बढ़ चुका है कि अब अगर वो सब ठीक करने की भी कोशिश करेंगे तो कुछ ठीक नहीं होगा तो अब वो सबूत का क्या करेंगे ? ”

अर्जुन ने कुछ सोचते हुए कहा “ वो अलक त्रिहाल है !!! अभंग त्रिहाल खुद अलक त्रिहाल की तारीफ करता है तो उनमें कुछ तो होगा ना ? ” तुषार को कुछ समझ में नहीं आया , उसने गहरी सांस लेकर कहा “ कोई बात नहीं , अलक सर के साथ सच में बहुत गलत हुआ है ,

अभंग सर तो फिर भी अपने परिवार के बीच में रहे हैं पर ये बात की अपने ही मां-बाप के कातिल को अपना बाप समझ कर उनके साथ रहना और अपने ही मां-बाप से नफरत करना ये सोचकर कि वो दुश्मन है फिर सच्चाई इस तरह सामने आना पता नहीं वो कैसे अपने दर्द को संभाले बैठे हैं ? अपने वजूद को चकनाचूर होते देख लिया उन्होंने !! पता नहीं कैसे उन्होंने खुद को समेट कर रखा होगा ? ”

अर्जुन ने वैसे ही जिस तरफ से अलक गया था उस तरफ देखते हुए कहा “ फिकर मत करो ! सबसे बड़े हैं ना ? वो सब संभाल लेंगे ! ” उन दोनों ने एक दूसरे को वापस देखा फिर वहां से चले गए ।

यहां दूसरी तरफ अलक वहां से सीधा बाहर आया था , वो संगीत में रुका ही नहीं था ! पार्किंग एरिया में आकर उसने अपनी गाड़ी स्टार्ट की थी और गाड़ी का रेस इतनी जोर से छोड़े जा रहा था कि उस सन्नाटेदार पार्किंग में सिर्फ उसी की गाड़ी का शोर था और इतना ज्यादा था कि वो किसी के भी कान में अजीब ढंग से चुभता !!!

अलक बहुत तेज रेस दे रहा था और एक झटके के साथ उसकी गाड़ी स्टार्ट हो गई , ये स्पीड इतनी ज्यादा थी कि बीच में आने वाला हर इंसान टकराता ही टकराता ! शायद वो किसी के लिए नहीं रूकता और हुआ भी यही था , अलक की गाड़ी हवा से बातें कर रही थी ! आसपास कुछ भी उसे दिखाई नहीं दे रहा था , उसकी गाड़ी की रफ्तार देख आसपास की गाड़ियां भी उसके लिए रास्ता छोड़ चुकी थी ।

और मुंबई की सड़कों पर उसकी गाड़ी किसी बारूद की रफ्तार से दौडे जा रही थी ! वो ना तो रुकने का नाम ले रहा था , ना स्पीड कम करने का नाम ले रहा था ! नसें उभर आई थी , शरीर हल्का पसीने से गिला हो गया था , आंखें लाल होते जा रही थी पर अब भी वो रुकने को तैयार नहीं था ! वो रो नहीं रहा था पर ये हालत रोने से भी ज्यादा बुरी हो गई थी !

और इसी गुस्से में वो गाड़ी शहर से बाहर तक ले आया था , न जाने कोई तो मोड पर उसने गाड़ी मोड़ी और ये मोड उसे सीधा सुसाइड पॉइंट पर लेकर आया था !! अलक अब भी सबसे अनजान बस गाड़ी चलाए जा रहा था , उसने सुसाइड पॉइंट का बोर्ड तक नहीं देखा था ! ये तो शुक्र हुआ की एन वक्त पर जहां रास्ता खत्म हो रहा था वहीं पर अलक ने ब्रेक लगा दिया !! और गाड़ी ऐसे अचानक ब्रेक लगाने की वजह से एक बार को पूरी गोल घूम कर रुकी थी ।

जमीन से उस गाड़ी के घिसने की वजह से जो शोर आया था वो कानों को चीर देने वाला था । पर अलक को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था , उसने स्टीयरिंग व्हील पर अपनी पकड़ कस रखी थी , एक हाथ अब भी गैर पर था ! वो गहरी सांस से ले रहा था और सामने उस खाई को देख रहा था , जिसमें अगले ही पल वो गिर भी सकता था ।

वो कुछ पलों तक ऐसे ही बैठा बिना पलके झपकाए उस खाई को देखता रहा और अचानक उन लाल आंखों से आंसू की लकीर खींची ! उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसे सांस ना आ रही हो ! कुछ भारी सा किसी ने उसकी सीने पर रख दिया हो । उसने तुरंत गाड़ी का दरवाजा खोला और बाहर चला आया ।

हेडलाइट अब भी ऑन थी और उस पूरे एरिया में सिर्फ उन हेडलाइट की रोशनी थी , हर तरफ अंधेरा था !!! अलक बाहर आया और गहरी सांस लेने लगा , उसके दोनों हाथ कमर पर थे, समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करें ? कैसे सब कुछ हैंडल करें ? और किस तरह खुद को संभाले ? ये चीज उसके ऊपर जैसे किसी बोझ की तरह आ गई थी !!!

उससे नहीं संभाल जा रहा था कुछ भी !! वो सामने उस अंधेरी खाई को देखते हुए जोर से चिल्लाया “ आहह्ह्ह्ह्ह्……. क्यूं……… क्यूं….. हर बार मै ही क्यूं ?????? ”

उसका पूरा शरीर कांप रहा था , वो जितने जोर से चिल्ला रहा था , अगर कोई सुन लेता तो खौंफ से मर जाता ! अलक एकदम से घुटनों के बाल गिर गया और उस खाई को , उस आसपास के अंधेरे को देखने लगा ! आंखों से अब लगातार आंसू बहे जा रहे थे ।

चेहरे के एक्सप्रेशंस तकलीफ वाले तो थे पर अब भी कोई उसे देखता तो वो कोई ना कोई बहाना बनाकर टाल सकता था !! उसकी आंखें पूरी लाल थी , शरीर पसीने से भीगा हुआ और वो खुद में ही बड़बड़ाने लगा “ ये बदनसीब ही है या जिम्मेदारियां जो मुझ पर आई है ?? मैंने तो कभी नहीं चाहा था कि मैं उस इंसान के साथ रहूं जिसने मेरे मां-बाप को मारा !!!? मैंने तो कभी नहीं चाहा था कि मैं उस इंसान से नफरत करूं जिसनै मुझे पैदा किया !!! मैंने तो कभी नहीं चाहा था कि मैं अभंग की लाइफ में कोई प्रॉब्लम क्रिएट करू !! मैं तो चाहता था कि वो अपनी लाइफ में खुश रहे और मेरे परिवार से दूर रहे तो फिर ये क्यों ? क्यूं ये सब हुआ ???? क्यूं मुझे ही परिवार से दूर कर दिया गया ???? क्यूं…….. ”

वो एक बार फिर चिल्लाया था , इतना सब कुछ बोलने के बाद उसकी सांस फूलने लगी । वो हांफ रहा था और एक बार फिर से उसने नजरे दौड़ा कर इधर-उधर देखा , वहां सिर्फ अंधेरा था ! उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या इतना बड़ा था ? कि उसे सब कुछ अकेले झेलना था ? ये सब क्या था जो उसके साथ हो रहा था ? वो क्यों हो रहा था ?

सब उसके दिमाग से परे था ! वो अब भी घुटनों के बाल वैसे ही बैठा था , वो धीरे से जमीन पर हाथ रखकर खड़ा हुआ , ऐसा लग रहा था जैसे सारी हिम्मत खत्म हो चुकी हो और अचानक उसका फोन बजा !!! उस सन्नाटे में रिंग की आवाज इतनी तेज गूंजी थी कि कोई भी चौंक जाता !!!!

अलक ने अपनी जेब से फोन निकाल कर देखा और स्क्रीन पर फ्लैश हो रहे उस नाम को देखकर उसका दिल कुछ और खत्म हुआ ! आंख से आंसू तो बह रहे थे फिर चेहरे के हाल खत्म होते जा रहे थे…: फ्लैश होता नाम अभंग का था !!! वो खामोशी से अपने फोन को देखता रहा , पता नहीं ये कुदरत का खेल था या कोई साजिश ? जो उसे धीरे-धीरे खत्म करे जा रही थी !!!!!

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