
नासिक -
शानी और दर्श दोनों ही बस में बैठे थे। बस की लास्ट वाली सीट शानी और दर्श के हाथ में आई थी। पीछे कोई था ही नहीं। सबसे पहले बस में आकर ही वो बैठे थे, और अभी भी रिक्तम दर्श के साथ फोन पर था। उसे फिक्र हो रही थी। उन्हें अब सब कुछ पता था, इन फैक्ट रिक्तम ने दृष्टि को भी अब सब कुछ बता दिया था और वो अलग से दर्श को डांट लगा रही थी।







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