
शिद्दत की जब आंख खुली तो उसके सिर में बहुत तेज दर्द हो रहा था। वो अपना सिर पकड़े बेड से उठकर बैठी थी। जब उठकर बैठी तो उसने देखा ये वो घर नहीं था जहां वो रहती है । यहां पर ना तो वो झूमर था, ना उसका पति , ना उसके कपड़े चेंज किए हुए थे। ये वो सिचुएशन नहीं थी जो सब ठीक हो जाने के बाद उसके सामने आती थी।
ये कुछ और था, ये जगह कोई और थी। शिद्दत हैरानी से इधर-उधर देखने लगी। ये कमरा और यहां रखी चीजें काफी प्यारी प्यारी थी , काफी खूबसूरत सी देखने से ही पता चल रहा था कि ये शिद्दत की पसंद के अकॉर्डिंग डेकोर किया गया था। उसे लाल रंग बहुत पसंद था।







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