मुंबई -
शिद्दत का दिल जोरों से धड़कने लगा । और रक्स एक बार फिर से उठकर बैठ गया , वो शिद्दत के पीछे बैठा था । उसने धीरे से सिर झुका कर उसके कंधे और गर्दन को जोड़ते हिस्से को चुमा और उसकी ड्रेस की डोरियों को खोल दिया । शिद्दत ने कसके अपनी ड्रेस मुठ्ठी में भरते हुए धीरे से कहा “ र….रक्स…. मत करो … अब अगर नहीं रुके तो रोक नहीं पाऊंगी …. और जो होगा वो सही नहीं है …… ”







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