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Dur raho mujjse !!

गोवा -

रक्स ने पलटकर शिद्दत को देखा और देखा तो बस देखता ही रहा गया , शिद्दत कितनी प्यारी लग रही थी। और शिद्दत ने एक बार फिर से उसी लहज़े में बड़े प्यार से उसे देखते हुए कहा, "आपका काम खत्म हो गया फोटोग्राफर साहब, ? दुल्हन की तरफ से देख लीजिए। "

उसने आशिकाना अंदाज में गर्दन हिला कर अपना सिर एक और करते हुए कहा, "असली मॉडल तो यहां खड़ी है, मेरा काम कहां से खत्म हो गया?" उसने अपना कैमरा वापस चेहरे के सामने किया।

वो फोटो क्लिक करने को हुआ कि शिद्दत ने एकदम से कैमरे के सामने अपना हाथ कर दिया। पर फिर भी वो फोटो क्लिक हो चुकी थी और शिद्दत के हाथ बीच में लाने की वजह से वो फोटो और अच्छी आई थी।

वो अपनी आंखें बड़ी करते हुए बोली, "क्या कर रहे हो, रखो नीचे ।" वो बोल नहीं रही थी कि सामने से निधि की आवाज आई, "रक्स, शिद्दत! अगर तुम दोनों का रोमांस हो गया हो तो हम दोनों पर ध्यान दें धो, हमारी शादी है ना।"

शिद्दत ने एकदम निधि की तरफ देखा का अफकोर्स वो टोंट मार रही थी। और ये जरूरी भी था क्योंकि सब का ध्यान जहां दूल्हा-दुल्हन पर था, वहां ये दोनों अपने में ही लगे हुए थे।

रक्स ने कैमरे को एक बार फिर से अपने हाथों में अच्छे से लिया और गहरी सांस भरते हुए बोला, "अफकोर्स, नौकर जो हूं मैडम आपका।" वो उन दोनों की तरफ चल दिया।

तो शिवम ने वैसे ही हंस कर उसका मजाक उड़ाते हुए कहा, "नहीं , तू शिद्दत के लिए वो ठीक है, हम लोगों का बस फोटोग्राफर बन जा, इधर आ।"

वो उनके पास चला आया और उन दोनों के काफी सारे कपल फोटोस लेने लगा और बाकी सारे दोस्तों को वहां एक तरफ बैठा दिया गया था।

शादी के लिए डेस्टिनेशन वेडिंग चुनी गई थी गोवा की और जैसा निधि ने सोचा था, सारी तैयारी बिल्कुल वैसे ही की गई थी। वुडन के वो बेंचेज बिल्कुल ऐसे थे जैसे स्कूल में हुआ करते थे। उन्हें लाइन कर लगाया हुआ था दो-दो की रो में। उनसे कुछ दूरी पर मंडप सजाया हुआ था। व्हाइट बंबूस लगाए हुए थे। उनके ऊपर रंग-बिरंगे फूल और कर्टन लगाए हुए थे और उनके साथ फेयरी लाइट लगाई हुई थी।

वो नजारा सच में बेहद खूबसूरत है। फादर थॉमस जो उनकी वेडिंग करवाने वाले थे, वो अभी तक आए नहीं थे क्योंकि अभी तो काफी टाइम बाकी था। और उनके आने तक यहां बहुत मजे से फोटोशूट चले जा रहा था।

पार्टी वापस रिसोर्ट में थी, जो शादी के बाद होनी थी। इसीलिए यहां किसी को कोई टेंशन नहीं थी। वहां सर्वेंट को सारा काम समझा दिया गया था, क्योंकि जैसे ही यहां शादी खत्म होती, दूसरी तरफ पार्टी शुरू होने वाली थी।

रक्स और शिद्दत को कल सुबह वापस निकलना था, इसलिए सब कुछ आज ही फिनिश करना था। रक्स निधि और शिवम की फोटोस ले रहा था और उनके साथ कुछ-कुछ दोस्त एक-एक करके जाकर फोटोस खिंचवा रहे थे। बीच-बीच में कपल पोज भी वो लोग दे रहे थे अपनी एल्बम के लिए।

सब कुछ काफी अच्छा चल रहा था। काफी सारे दोस्त बेंचेज पर जाकर बैठ चुके थे और उनमें सब में शिद्दत भी थी, जो एक तरफ बेंच पर बैठी चुपचाप रक्स को देख रही थी।

रक्स का ध्यान शिवम और निधि पर था। वो अपने हाथ के इशारे से और जोर से चिल्ला कर पता नहीं क्या-क्या निधि और शिवम को समझाया जा रहा था। पर शिद्दत को उसकी आवाज सुनाई ही नहीं दे रही थी। वो बस उसके हिलते होठों को देख रही थी, उसके चेहरे पर बनते-बिगड़ते भाव को देख रही थी।

कभी वो अच्छी पोज़ और अच्छे फोटोस देखकर खुश हो जाता, तो कभी फोटो और पोज़ बिगड़ने पर उसके माथे पर बल पड़ने लगते। कभी वो शिवम के पास जाकर उसे कोई फोटो दिखाता, तो कभी शिवम को ही इशारे से अपने पास बुलाता। उसकी नजर रक्स पर बस टिकी हुई थी।

और वो मन ही मन सोचने लगी,"मैं वो बन चुकी हूं जो वो खुद है... मेरी मोहब्बत का वक्त कितना ही बता दूं, पर इसकी गहराई पूछो तो मैं जानती ही नहीं... मेरी ख्वाहिश थी कि वो मुझे ऐसे चाहे जैसे मैं चाहती हूं। पर नसीब देखो मेरा... उसे मेरी वो मोहब्बत मिली जैसी मैं चाहती हूं। वो कहता है मैं अच्छी लग रही हूं, पर मैंने तो कब का खुद को छोड़ दिया है। ये तो अपने आप से लगाव है उसका, जो उसे मैं खूबसूरत लगती हूं। उसकी मोहब्बत में मैं उसकी नहीं, उसी की हो चुकी हूं... खोना तो अभी रह ही गया। अभी तो मैं बस रक्स बनी हूं, अभी तो रक्स में खोकर शिद्दत बनना बाकी ही रह गया..."

उसने गहरी सांस भरी और एक बार को अपनी नज़रें नीचे झुका लीं। फिर वापस अपना चेहरा उठाकर रक्स की तरफ देखा। वो अब भी अपने में ही बिजी था और शिद्दत उसे बिना पलक झपकाए देख रही थी। वो एक बार फिर अपने सोच में गुम हो चुकी थी,

"मैं तुमसे कितनी ही मोहब्बत कर लूं, मैं तुम्हें कितना ही यकीन दिला दूं कि मुझे तुमसे मोहब्बत है, आज से नहीं, शुरू से है... 13 सालों से है। पर तुम यकीन नहीं करोगे, क्योंकि अब जो मैं तुम्हें सच बताऊंगी, तुम्हें उसके सामने मेरी मोहब्बत भी फीकी लगेगी। तुम्हें लगेगा कि मैं ये सब कुछ सिर्फ तुम्हें धोखा देने के लिए कर रही हूं। ये सिर्फ मोहब्बत का नाटक है, जो मैं अपने आप की वजह से कर रही हूं।

पर मैं तुम्हें कैसे यकीन दिलाऊंगी कि उस इंसान से मेरा लगाव उसी दिन खत्म हो गया, जब मुझे ये पता चला कि उन्होंने तुम्हारे मां-बाप को मारा है। मैं जितना उस इंसान से नफरत कर रही हूं, उससे कई ज्यादा नफरत मुझे खुद से है... ना सिर्फ इसलिए क्योंकि मैं उस इंसान का खून हूं, बल्कि इसलिए क्योंकि वजह मैं थी।

मेरी वजह से तुम उनकी नजरों में आए। मेरी वजह से वो तुम्हें इज्जत पर दाग लगने का एक कारण समझने लगे। मेरी वजह से तुम्हारे मां-बाप के साथ वो सब कुछ हुआ। और अब मैं इस बात को तुमसे न जाने कब से छुपाए बैठी हूं।

केतन भईया ने भी तुम्हें कुछ भी नहीं बताया। अगर तुम्हें पता चला कि हम दोनों को सब कुछ पहले से पता था और फिर भी हमने तुमसे सारी चीजें छुपा कर रखीं है, तो तुम क्या करोगे?

मैं जानती हूं, मैं बहुत डर रही हूं... पर मैं अब नहीं डर सकती। क्योंकि अगर अब इससे और ज्यादा देर की, तो नफरत तो अपनी जगह पर रहेगी ही, पर मैं तुम्हें पूरी तरह खो दूंगी। और मैं अपनी दुनिया नहीं खो सकती। मैं अपने आप को नहीं खोना चाहती। अगर मैंने तुम्हें खो दिया, तो मैं सब कुछ खो दूंगी जो मेरा है। मुझे कैसे भी करके तुम्हें सारा सच बताना होगा और मैं आज तुम्हें सब कुछ बता दूंगी।"

वो अपने ही सोच में थी और तभी समायरा ने उसके कंधे को जोर से झकझोरते हुए कहा,"कहां ध्यान है तुम्हारा, मैडम?"

शिद्दत ने एकदम से उसकी तरफ देखा, फवो निधि और शिवम की तरफ दिखाते हुए बोली “ वो देखो, बुला रहा है तुम्हें।" शिद्दत ने वापस उसकी तरफ देखा तो रक्स उसे हैरानी से देख रहा था। वो कब से शिद्दत का नाम ले रहा था, पर शिद्दत का ध्यान ही नहीं था। शिद्दत एकदम से खड़ी हुई, वो गिरने को हुई कि समायरा ने एकदम से उसे संभाल लिया। रक्स उसकी तरफ आ रहा था, पर अचानक से रुका।

समायरा हैरानी से बोली "शिद्दत, ठीक हो न तुम? क्या हो गया तुम्हें?"शिद्दत ने एकदम से ना में सिर हिला लिया और खुद को नॉर्मल करते हुए बोली,"नहीं, वो मैं कुछ सोच रही थी।"

उसने इतना कहा और धीमे कदमों के साथ रक्स की तरफ चली आई। वो निधि के पास खड़ा था और दूसरी तरफ शिवम के पास जाकर शिद्दत को खड़ा होना था।

वो चुपचाप जाकर शिवम के पास खड़ी हो गई। उसने शिवम के हाथ में अपना हाथ डाला और मुस्कुरा कर बोली, "गॉड ब्लेस यू। आपकी शादीशुदा जिंदगी बेहद खूबसूरत हो। आप दोनों हमेशा एक साथ रहो।"

शिवम उसे देखकर मुस्कुराया और उसके हाथ को देखकर बोला,"बिल्कुल, अगर तुमने ये हाथ नहीं निकाला तो। वरना तुम्हारा पति शादी होने से पहले मेरा हाथ तोड़ देगा।"

शिद्दत हल्का सा हंसी, क्योंकि वो दोनों बहुत धीरे बात कर रहे थे। निधि और रक्स तक आवाज पहुंचना मुश्किल था।

और उन दोनों के पास ही खड़े निधि ने रक्स के कान में वैसे ही उसका हाथ पकड़े हुए कहा, "मुझे यकीन नहीं होता तुमने शिद्दत से शादी कर ली... वो लड़की जिसे तुम एक आंख पसंद नहीं करते थे।" रक्स हल्का सा हंसा और उसकी तरफ वैसे ही झुक कर बोला,"क्या करें, तू भी तो शिवम को पसंद नहीं करती थी। फिर भी उससे शादी कर रही है न। बस वैसे ही मैंने भी कर ली।"

निधि हल्का सा मुस्कुराई और कैमरामैन की तरफ देखा , जो सचिन था और उनकी फोटोस ले रहा था, उसकी तरफ देखते हुए मुस्कुरा कर बोली,"और क्या शिद्दत को पता है कि हम दोनों..." वो बोल ही रही थी कि रक्स ने वैसे ही कैमरे में देखकर मुस्कुराते हुए बीच में कहा, "बिल्कुल नहीं... और ना ही उसे जरूरत है कुछ भी जानने की, है ना?"

उसने वापस निधि की तरफ देखा। वो मुस्कुरा रहा था, पर उसकी उस स्माइल में भी एक वार्निंग थी। निधि उसे खामोशी से देखती रही और रक्स बड़े प्यार से बोला,"तुम्हारी नई जिंदगी की शुरुआत होने जा रही... और मेरी जिंदगी की शुरुआत हो चुकी। ये राज, राज ही रहे तो ज्यादा अच्छा होगा।"

,वो वहां से हटा और पानी की बोटल उठिकर पानी पीने लगा की उसके कानों में आवाज पड़ी "और तुम्हें क्यों लगता है कि हमें ये राज नहीं पता?"

रक्स के मुंह से वो पानी फव्वारे की तरह बाहर आया। उसने खांसते हुए एकदम से अपने मुंह पर हाथ रखा और पलट कर देखा। शिवम और शिद्दत दोनों एक साथ खड़े उसे देख रहे थे। साइड में निधि खड़ी थी, जिसके चेहरे पर बेचारगी थी।

रक्स को समझ में नहीं आया ये क्या हुआ। और शिवम ने अजीब ढंग से, पर जरा उसे डराने वाले अंदाज में कहा,

"तुझे क्या लगता है, मुझे नहीं पता? जो तुम दोनों की वॉशरूम में किस्स हुई थी।" रक्स की आंखें और बड़ी हुईं। और फिर शिद्दत वैसे ही बोली, "और तुम्हें क्या लगता है, हमें नहीं पता वो लव लेटर जो तुमने पूरी क्लास के हाथों निधि के लिए भिजवाए थे।"

रक्स को और ज्यादा खांसी आने लगी। वो हैरानी से उन दोनों को देखने लगा। शिवम और शिद्दत ने एक-दूसरे को देखा, फिर एकदम से हंस पड़े।

वो सारे क्लासमेट्स, जो एक-दूसरे से बातें कर रहे थे, उनका ध्यान अचानक उन दोनों की तरफ आ गया। सचिन, जो कैमरा लिए खड़ा था, वहीं से बोला, "किस बात पर हंस रहे हो, मुझे भी बता दो भाई।"

शिवम ने हल्का सा हंस कर उसकी तरफ पलटते हुए कहा,"ये राणा साहब... इन्हें लगता है चाल चलना सिर्फ इन्हीं को आता है। इन्हें लगता है किसी को पता ही नहीं है कि शिद्दत के आने से पहले इनका चक्कर निधि के साथ चल रहा था। भाई, एक वजह यही थी कि निधि शिद्दत को पसंद नहीं करती थी। बिकॉज़ तुम दोनों के बीच कुछ चल रहा था।

बेचारी शिद्दत जब आई, तो उसे लग रहा था कि तेरा और सामायरा का चक्कर चल रहा है। पर तेरे और समायरा के बीच तो हमेशा से कुछ था ही नहीं, तुम दोनों तो बेस्ट फ्रेंड्स थे। तेरा चक्कर तो निधि के साथ चल रहा था, जो शिद्दत के आने के बाद खत्म हो चुका था, ऑलमोस्ट।"

गोवा -

रक्स का चेहरा देखने लायक हो गया था। फिर अचानक उसके चेहरे के भाव चेंज हुए और उसने बड़े लापरवाही से बोतल का ढक्कन बंद करते हुए अपने कंधे उचकाकर कहा,"सो व्हाट! शिद्दत नहीं होती तो आज तू भी यहां पर दूल्हा बने नहीं खड़ा होता। शायद मैं और निधि शादी कर रहे होते।"

उसने निधि के पास जाकर उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे खुद से लगाते हुए कहा था। निधि ने हार मानते हुए उसे उसकी तरफ देखते हुए उससे दूर हटकर कहा, "बिल्कुल नहीं! मैं तुमसे शादी कभी नहीं करती, ठीक है?"

रक्स ने कंधे उठाते हुए कहा,"तो तुमसे पूछता कौन? इससे भी तो जबरदस्ती शादी की है , तुमसे भी कर लेता।" उसने शिद्दत की तरफ इशारा करते हुए कहा था। शिद्दत ने अपनी कमर पर हाथ रख लिया और लगभग उसे घूरते हुए बोली,"अच्छा बेटा! रुको तो।"

उसने अपने पैर से हील निकाली और रक्स की तरफ फेंक दी। रक्स एकदम से हंसा और तुरंत वहां से भाग गया। शिद्दत ने उसकी तरफ अपनी हील फेंकी, पर वो रक्स को लगी ही नहीं। वो दूर भाग चुका था। शिद्दत ने अपने पैर से दूसरी हील भी निकाल कर फेंक दी और उसके पीछे ऐसे ही दौड़ लगा दी।

उन दोनों को ऐसे देखकर शिवम एकदम से हंसा। उसने हंसते हुए निधि की तरफ देखा तो निधि ने स्माइल करते हुए कहा,"मुझे सच में नहीं पता था कि उसने शिद्दत को कुछ भी नहीं बताया।"

शिवम ने मुस्कुराकर उसे गले लगाते हुए कहा, "ऑफ कोर्स वो नहीं बताता। शिद्दत बहुत सेंसिटिव है। उसे ये चीज भी बहुत बुरी तरह हर्ट करती, ये वो जानता है। और आज भी ये सब मजाक के तहत सामने आया है, इसीलिए चीज इतनी बिगड़ी नहीं। वरना शिद्दत उस पर जरूर एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का केस कर देती।"

वो एकदम से हंस दिया तो निधि भी उसके साथ हंसी। उसने शिवम का हाथ अपने हाथ में लेकर कहा, "बचपन जो भी रहा हो... मैं तुमसे प्यार करती हूं। और जब तुम्हें देखती हूं तो सोचती हूं कि मुझे तुमसे ज्यादा प्यार कोई नहीं कर सकता। मैं तुमसे शादी सिर्फ इसलिए नहीं कर रही कि तुम मुझसे प्यार करते हो, बल्कि इसलिए कर रही हूं क्योंकि मैं तुमसे प्यार करती हूं। सिर्फ तुम ही मेरी नहीं, पर मुझे तुम्हारी जरूरत है और मैं इसीलिए तुमसे शादी कर रही हूं।"

उसने काफी प्यार से उसकी आंखों में देखते हुए ये बात कही थी।शिवम ने मुस्कुराकर उसके माथे को चूमते हुए कहा, "अब इनका क्या?" उन दोनों ने एक साथ रक्स और शिद्दत की तरफ देखा, जो एक बार फिर अपने में ही लगे हुए थे।

शिद्दत अपने दोनों हाथ उठाकर उसके सीने पर मार रही थी और रक्स उसके हाथों को पकड़ने की कोशिश कर रहा था।वो दोनों एक बार फिर से हंस दिए और इतने में समायरा ने कहा,"ओ कपल्स अपने-अपने जगह पर आ जाओ सब लोग। देखो, फादर आ चुके हैं। आ जाओ, आ जाओ, वेडिंग का टाइम हो गया।"

उसकी आवाज सुनकर लगभग सबका ध्यान उसकी तरफ आया था। फिर एक-एक कर सब जाकर अपने-अपने जगह पर बैठ गए।

फादर थॉमस ने एक तरफ शिवम को और दूसरी तरफ निधि को खड़ा किया और उनकी वेडिंग करवाई। रिंग पहनाई गई, उन दोनों ने सारे वादे करते हुए एक-दूसरे को हस्बैंड-वाइफ माना। सिग्नेचर लिए गए, फिर किस की गई और शादी कंप्लीट होने पर सबने जोर से तालियां बजाईं।

शादी कंप्लीट होते ही रक्स ने तुरंत सबके सामने आते हुए कहा था, "ओके! सो यहां से सीधा सबको वापस रिजॉर्ट जाना है। पार्टी वहीं पर है। शिवम, निधि तुम दोनों पहले निकलो, हम सब बाद में आएंगे तुम्हारे पीछे-पीछे।"

शिवम ने हां में सिर हिलाया। कुछ गाड़ियां उसके साथ ही निकल चुकी थीं, क्योंकि सर्वेंट भी थे और स्वागत के लिए कुछ दोस्तों का भी होना जरूरी था। और कुछ लोग बाद में जाने वाले थे। निधि ने जाते-जाते बुके फेंका था, जो समायरा के हाथ आया। सब हूटिंग करने लगे थे और समायरा ने उसे हाथ में पकड़कर बस मुस्कुरा कर बोली,

"ये जिसके हाथ में आया है उसका तो शादी से कोई लेना-देना ही नहीं। पता नहीं, कौन लिखा है मेरे नसीब में।"

सब एक-एक करके वहां से निकलने लगे। यहां की जो डेकोरेशन थी, उसे आज ही निकलवाना था क्योंकि ये सारे काम रक्स के थे। और रक्स जब सुबह चला जाता, तो उसकी निगरानी के बिना ये काम होना नामुमकिन था। कुछ भी अच्छे से नहीं होता। इसलिए वो सब कुछ हटवाने में लग गया।

धीरे-धीरे सब लोग वहां से जाने लगे थे। शिद्दत रक्स के साथ जाने वाली थी, इसलिए वो वहीं पर थी पर समायरा, जिसका चेहरा उदास था, वो अपने हाथों में बुके लिए समुद्र किनारे खड़ी थी और लहरों को देख रही थी।

शिद्दत, जो कब से एक बेंच पर बैठे रक्स को देख रही थी, उसकी नजर जब समायरा पर गई तो उसे अजीब लगा। वो उठकर उसके पास चली आई और उसके पास में आकर खड़ी होते हुए, उसी की तरह उन लहरों को देखते हुए कहने लगी, "कोई है दिल में? जिसने दिल को बहुत बुरी तरह तोड़ा है। नाम नहीं लिया जा रहा, पर चेहरा उसे बताए बिना चुप भी नहीं रहता।"

समायरा ने हल्का सा मुस्कुरा कर समुद्र की तरफ देखते हुए कहा,"वो बेवफा भी नहीं... ये तो दिल की गलती है कि उसने अनजाने में वफा कर ली और अब भुगत रहा है।" उसने शिद्दत की तरफ मुस्कुरा कर देखा। शिद्दत को उसकी बात समझ में नहीं आई और समायरा ने वो बुके उसे देते हुए कहा, "तुम बहुत लकी हो शिद्दत। हर एक को उनका प्यार नहीं मिलता।"

वो जाने को हुई तो शिद्दत को एकदम से याद आया और वो तुरंत बोली, "तुम रक्स को पसंद करती थी?" समायरा के कदम ठहरे। वो बिना पलटे वैसे ही खड़ी बोली, "पसंद नहीं करती थी... पागल थी उसके पीछे। पर उसे ना तब मुझसे प्यार हुआ ना फिर कभी क्योंकि उपरवाले ने उसके नसीब में तुम्हें लिखा था। तब भी और अभी।

निधि से जब उसका ब्रेकअप हुआ, जब वो मेरी तरफ, मेरे करीब आने वाला था, तब तुम उसकी जिंदगी में आ गई। और फिर जब तुम गई, तो मैंने सोचा था मुझे वो मिल चुका है। पर मैंने उसे हमेशा-हमेशा के लिए खो दिया।

यहां आई थी ये सोचकर कि रक्स को अपने दिल की बात बता दूंगी। उसे कहूंगी कि वो भले कोई भी है — माफिया है, गुंडा है, जैसा भी है — मैं उससे दूर नहीं रहना चाहती। पर यहां आकर पता चला कि उसने तुमसे शादी कर ली है।

तकलीफ बहुत हुई, पर मैं इस चीज में बिलीव नहीं करती कि जो मेरा नहीं है, मैं उसे कैसे भी करके उसे पा लूंगी। अगर वो मेरा होता, तो सबसे पहले वो मुझे ही मिलता। पर वो मेरा नहीं था, इसलिए मेरे हाथ भी नहीं लगा।"

वो शिद्दत की तरफ पलटी और मुस्कुरा कर बोली, "तुम बहुत लकी हो। हर एक के नसीब में रक्स नहीं होता। उसे संभालकर रखना, कहीं खो मत देना।"

शिद्दत कुछ भी नहीं बोल पाई और समायरा अपने आंसू पोंछते हुए वहां से चली गई।

शिद्दत बस वहीं खड़ी उसे देखती रह गई। उसे नहीं पता था कि समायरा के दिल में रक्स के लिए ये फिलिंग्स हैं। हां, उसे हमेशा लगता था कि वो बचपना था, समायरा रक्स की बेस्ट फ्रेंड थी, इसलिए शायद उसे शिद्दत से जलन थी।

ये जो भी था, पहले तो उसे ये भी लगता था कि शायद समायरा रक्स की गर्लफ्रेंड है। पर धीरे-धीरे उसे समझ आने लगा था कि वो दोनों बस दोस्त हैं। और आज समायरा की असल फिलिंग्स जानकर उसे सच में हर्ट हो रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे वो समायरा और रक्स के बीच में आई थी।

उसने रक्स की तरफ देखा। वो काम करवाने में बिजी था। भले ही समायरा की फिलिंग्स जो भी हों, पर शिद्दत ने रक्स के मुंह से कभी किसी लड़की का जिक्र सुना ही नहीं था , उसने कभी किसी के बारे में नहीं सुना, न ही किसी के बारे में उसने अपनी पसंद जाहिर की हो।

वो उसे देखते रही और रक्स, जिसकी अचानक नजर घूमते-घूमते शिद्दत पर गई थी, उसने शिद्दत को लहरों के इतना करीब खड़े देखा तो उसी की तरफ चला आया।

वो उसके चेहरे पर उड़कर आ रही लटों को कान के पीछे करते हुए बोला,

"यहां क्यों खड़ी हो? लहरें कितनी बड़ी-बड़ी उठ रही हैं, दिख रही हैं? चलो पीछे।"

वो उसका हाथ पकड़कर उसे ले जाने को हुआ कि शिद्दत ने बिना उसके साथ जाए, उसके हाथ से अपना हाथ छुड़ाते हुए कहा, "कुछ बताना है मुझे तुम्हे।"

रक्स ने पहले अपने खाली हाथ को देखा। शिद्दत ने बड़ी बेरुखी से उससे अपना हाथ छुड़ाया था। रक्स उसकी तरफ पलटा तो शिद्दत की आंखों में आंसू थे। वो हैरानी से उसे देखने लगा और शिद्दत ने गहरी सांस लेकर अपने आंसू पोंछते हुए कहा,"तुम्हें पता है, तुमने आज मुझे कितना हर्ट किया है?"

रक्स का दिमाग काम नहीं किया। क्या मतलब था उसका?वो वापस शिद्दत के सामने आकर खड़ा हुआ। उसे रोते हुए देखकर बोला, "क्या किया है मैंने? और तुम रो क्यों रही हो? अगर मेरी किसी बात पर गुस्सा आ रहा है तो डांटो ना मुझे , रोना बंद करो।"

वो उसके चेहरे को छूकर उसके आंसू पोंछने को हुआ कि शिद्दत ने एकदम से उसके हाथ झटक दिए, "दूर रहो मुझसे! मैं हमेशा ये सोचती रही कि शायद मैं तुम्हारी जिंदगी की पहली लड़की थी। पर तुमने मुझे कभी ये नहीं बताया कि तुम्हारी जिंदगी में निधि भी थी, समायरा भी थी। हमेशा मुझसे झूठ बोलते रहे। कभी किसी का जिक्र तक नहीं किया मेरे सामने। कभी अपनी पसंद नहीं रखी। बस शिद्दत, शिद्दत, शिद्दत करते रहे। और अब मुझे क्या पता चल रहा है?"

रक्स हैरान था। उसे लगा कि जो निधि और उसके बारे में शिवम ने बताया, शायद उसकी वजह से वो हर्ट हुई थी।

वो एकदम से उसके करीब आते हुए बोला, "शिद्दत, ऐसा बिल्कुल नहीं है जैसा तुम समझ रही हो। निधि और मेरे बीच में ऐसा कुछ भी नहीं था। इट्स जस्ट अट्रैक्शन, जो उस उम्र में लाजमी होता है। सिर्फ एक अट्रैक्शन था, कुछ वक्त का, जो खत्म भी हो चुका था, स्कूल टाइम में ही जा चुका था। उसके लिए रोने की जरूरत नहीं है। और हां, मेरी लाइफ में कोई नहीं है !!!! और जब कोई था नही तो मैं किसका जिक्र करूंगा? और मैं 'शिद्दत, शिद्दत' करता रहता हूं क्योंकि मेरी बीवी हो तुम , मेरी लाइफ में सिर्फ तुम हो। तो मैं तुम्हारा नाम नहीं लूंगा तो किसका नाम लूंगा?"

वो परेशान था। शिद्दत ने किस चीज को टॉपिक बना लिया था और रो अलग से रही थी। एक तो रक्स को इसी चीज पर इरिटेशन हो रही थी कि वो रो क्यों रही थी। ये ऐसी कोई रोने जैसी बात नहीं थी।

शिद्दत ऐसे ही उसे देखती रही और फिर बोली, "नहीं, तुम मेरी बात सुनो। जितनी सफाई तुम्हें देनी थी ना, तुमने दे दी। पर अब जो मैं तुमसे कहने जा रही हूं ना, वो ये है कि तुमने मुझे धोखे दिए। तुमने अपने अफेयर छुपाए।पर मैं... मैं तुमसे प्यार नहीं करती रक्स राणा, तुम्हें कल रात को मैंने जो कुछ भी कहा, वो सिर्फ इसलिए था ताकि तुम मेरे प्यार में पड़ जाओ। पर तुम तो कभी मेरे प्यार में पड़ ही नहीं सकते। तो फिर मेरा तुम्हारे साथ रहने का कोई फायदा ही नहीं हुआ।"

रक्स की हैरानी कुछ और बढ़ी। शिद्दत को पता भी था कि वो क्या बोल रही है। वो ऐसे ही रक्स को घूरती रही, रोती रही और उसे देखते हुए दो कदम की दूरी पर हटते हुए बोली,"हां, रक्स राणा! धोखा दिया है मैंने तुम्हें। तुम्हारे साथ इन दो दिनों में मैंने जो कुछ भी किया है, सिर्फ इसलिए ताकि तुम्हें मुझसे प्यार हो जाए, ताकि तुम मुझ पर फिदा हो जाओ। पर ऐसा हो ही नहीं सकता। मुझे लग रहा था, अकेला लड़का है, कभी किसी लड़की के करीब नहीं गया। मैं ज़रा सिड्यूस करूंगी, प्यार भरी बातें करूंगी तो मेरे प्यार में पड़ जाएगा। पर तुम तो मेरे किसी जाल में फंसने को तैयार ही नहीं हो। 3 से 4 महीने होने आए हैं शादी को, अब तक... अब तक तुम मेरे किसी काम नहीं आए। तो फिर मैं तुम्हारे साथ क्यों रहूं? क्या मिलेगा मुझे तुम्हारे साथ रहकर? एक गुंडे के साथ रहकर?"

रक्स की हैरानी इस बार बढ़ी नहीं, बल्कि उसकी पूरी हैरानी खत्म होकर उसे शॉक लगा था। वो शिद्दत की तरफ कदम बढ़ाते हुए ज़रा तेज आवाज में बोला "हैव यू लॉस्ट योर माइंड? तुम्हें पता है, तुम क्या बकवास किए जा रही हो? हां, जानता हूं गुस्सा हो, पर गुस्से में कुछ भी बोलने की जरूरत नहीं है। लैंग्वेज संभालकर बात करो अपनी। क्योंकि तुम्हारे सामने सिर्फ कोई गुंडा नहीं, तुम्हारा पति भी खड़ा है।"

और वो बोल ही रहा था कि शिद्दत वैसे ही उसी की तरह चिल्लाई,"ओ रियली? तो क्या फर्ज अदा किए हैं तुमने पति वाले? बताओ मुझे! जो कुछ भी किया है ना, वो मैंने किया है। और किस हक से पति मानते हो खुद को मेरा?क्या मैं तुम्हें अपना पति मानती हूं? नहीं! वो तुम थे जिसने मुझसे जबरदस्ती शादी की। वो तुम थे जो मुझे यहां मुंबई लेकर आए थे। वो तुम थे जिसने सब कुछ किया। मैंने तो कुछ भी नहीं किया।तो मैं तुम्हें क्यों पति मानूं? कौन से पति हो तुम मेरे, जब मैंने तुम्हें अपनाया ही नहीं, शादी को अपनाया ही नहीं!"

शिद्दत और ज्यादा गुस्से में हुए जा रही थी। आंखों से आंसू बह रहे थे। वो चिल्लाए जा रही थी।

जारी है मिलते हैं नेक्स्ट चेप्टर में 😚 और आप कमेंट करके जाइएगा 🥰

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