मुंबई -
शिद्दत हल्के से मुस्कुराई, आंखों से बहते आंसुओं के बीच बोली “चलो ...सब खत्म करते हैं, क्योंकि अब मुझे पता है कि गलती मेरी है। अब मुझे पता है कि तुम ज़िंदा हो। अब मुझे पता है कि तुम अपनी फैमिली को संभाल सकते हो। अब मुझे पता है कि तुम किसी मजबूरी से हमसे दूर हो। और तुम्हें पता है कि हम किस हाल में हैं ? और किस हाल में नहीं हैं !! तो तुम सब कुछ संभाल लो... शायद मेरा कोई वजूद ही नहीं रहा।”







Write a comment ...