मुंबई -
शिद्दत जब अपने इन सारी सोच से निकाल कर बाहर आई, तो उसने देखा, उसे यहां लेटे-देटे दो-तीन घंटे हो चुके थे। शाम हो चुकी थी और अब जब शाम हुई थी, तो एक बार फिर उसके पास करने के लिए कोई काम नहीं था। नीचे वो जा सकती थी और अब तो उसे बिल्कुल भी नहीं जाना था। रक्स यहां था नहीं, सब अपने-अपने कमरे में होंगे, ये उसे पता था।







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