
मुंबई, रंधावा मेंशन -
उन तीनों की ऐसी नज़रें खुद पर पाकर, दृष्टि खड़ी होते हुए गहरी सांस लेकर धीमी आवाज में परेशान सी बोली, "तुम तीनों बहुत बड़े हो गए हो। तुम्हें इतनी अच्छी परवरिश दी, इतने अच्छे संस्कार दिए, इसलिए कि तुम अच्छे से आगे बढ़ो, ना कि अपनी उम्र से भी बड़े बन जाओ। जब तुम लोगों ने बहुत छोटी उम्र में अपने-अपने करियर choose कर लिए थे,










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