
मुंबई, सिंघानिया मेंशन -
इष्ठा आराम से बैठी छोले-चावल खा रही थी अपने कमरे में और उसके सामने भानु खड़ी थी। वो चुपचाप थी और अब डरी हुई सी लग रही थी, इष्ठा सच में खतरनाक साबित हुई थी उसके लिए और ये चीज अब भानु समझ चुकी थी। वो अब चाह कर भी इष्ठा से कोई पंगा नहीं लेना चाहती थी, वो जानती थी उसकी एक हरकत और वो इस नौकरी से हाथ धो बैठती।










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