
कशिव बोल रहा था, पर वो धीरे बोल रहा था। चेहरे पर तकलीफ थी, शायद वो उसे अपने चेहरे पर नहीं आने देना चाहता था, फिर भी आंखों से वो फूटकर बाहर आ रही थी।
माया उसे दो पल चुपचाप देखती रही, फिर गहरी सांस लेकर बोली, "कोई किसी के प्यार को ऐसे जज नहीं कर सकता। तुम मुझसे प्यार करते थे, मैंने इस चीज को एक्सेप्ट किया ना? जबकि मैं जानती थी कि मैं तुमसे प्यार नहीं करती; तो तुम इस चीज को एक्सेप्ट क्यों नहीं कर लेते कि मैं आरव से प्यार करती हूं?"










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