
जयपुर अंबर -
मिथिका ने आंखें बड़ी करके रिशान को देखा !!! तो रिशान ने खड़े होकर बात बदलते हुए कहा , "नाम को नाम से बुलाया जाए तो नाम में जान आ जाती है , इसलिए मुझे लगता है मुझे तुम्हें मिथिका ही कहनी चाहिए और अगर कुछ और कहना भी है तो वो आगे की बात है !!! खैर चलो कार्तिक से मिल लेते हैं , उसे कल मुंबई जाना पड़ेगा मटेरियल के लिए ।”











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